नारी शक्ति का नया अध्याय: सुकमा की दो युवतियों ने संभाली तेंदूपत्ता समितियों की कमान.
निलिमा बंडमवार
मुख्य संपादिका.
सुकमा/छत्तीसगढ:- छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित और अतिदुर्गम सुकमा जिले में महिलाओं ने एक नया इतिहास रच दिया है। तेंदूपत्ता बोनस घोटाले के बाद रिक्त हुई प्राथमिक लघु वनोपज समितियों के प्रबंधक पद की जिम्मेदारी पहली बार दो आदिवासी युवतियों को सौंपी गई है।
23 वर्षीय दिलपा किच्चे और 22 वर्षीय पुष्पा मड़काम ने इस वर्ष तेंदूपत्ता संग्रहण सीजन के दौरान 8,236 प्रमाणित बोरा तेंदूपत्तों के संकलन तथा लगभग 4.52 करोड़ रुपये के वित्तीय लेन-देन की सफलतापूर्वक निगरानी कर अपनी क्षमता का परिचय दिया है।
पिछले वर्ष तेंदूपत्ता बोनस वितरण में कथित अनियमितताओं के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा कार्रवाई किए जाने के बाद कई अधिकारियों को निलंबित किया गया था। इसके बाद नए प्रबंधकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई, जिसमें चयनित 11 प्रबंधकों में दो महिलाओं को भी अवसर मिला।
शिक्षा के बल पर मिली बड़ी जिम्मेदारी
कोरापार गांव की रहने वाली दिलपा किच्चे ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद उच्च शिक्षा प्राप्त कर यह मुकाम हासिल किया। उन्होंने दंतेवाड़ा में अध्ययन कर स्नातक की डिग्री प्राप्त की और आज एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी निभा रही हैं।
दिलपा कहती हैं, “यदि लड़कियां शिक्षित होंगी तो उनका भविष्य बदलेगा। सरकार को बेटियों की शिक्षा के लिए और अधिक प्रोत्साहन देना चाहिए।”
वहीं मड़कामपारा गांव की पुष्पा मड़काम ने बीएससी की पढ़ाई पूरी कर यह जिम्मेदारी संभाली है। उन्होंने कहा, “मेरे गांव में सरकारी नौकरी पाने वाली मैं पहली महिला हूं। अब मैं अन्य लड़कियों को भी शिक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित कर रही हूं।”
ऑनलाइन भुगतान से बढ़ी पारदर्शिता
तेंदूपत्ता बोनस घोटाले के बाद शासन ने पूरे जिले में ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था लागू कर दी है। इस वर्ष पहली बार सभी संग्राहकों के बैंक खातों में सीधे राशि जमा की जा रही है।
पिछले वर्ष 41 हजार से अधिक खातों में लगभग 39 करोड़ रुपये जमा किए गए थे, जबकि इस वर्ष यह राशि बढ़कर 46.41 करोड़ रुपये हो गई है, जो 46,625 खातों में सीधे हस्तांतरित की जाएगी।
महिला सशक्तिकरण की मिसाल
सुकमा के जिला वनाधिकारी अक्षय कुमार भोसले ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र की महिलाओं द्वारा इतनी बड़ी जिम्मेदारी संभालना गर्व की बात है। इससे अन्य युवतियों को भी शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।
बदलते सुकमा की नई पहचान
एक समय नक्सलवाद, भय और भ्रष्टाचार के लिए चर्चित सुकमा अब महिला सशक्तिकरण, पारदर्शी प्रशासन और शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। दिलपा किच्चे और पुष्पा मड़काम की सफलता ने पूरे आदिवासी अंचल की बेटियों के लिए एक नई राह और नया आत्मविश्वास पैदा किया है।
